18वें दिन दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब


18 दिन से अन्न का एक दाना नहीं, अब दिल्ली हाईकोर्ट भी हुआ गंभीर... सोनम वांगचुक के अनशन पर सरकार से मांगा जवाब

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नई दिल्ली।

जंतर-मंतर की दोपहर इन दिनों पहले जैसी नहीं दिख रही है। धूप सिर पर चढ़ी रहती है, लेकिन एक कोना ऐसा है जहाँ भीड़ कम और सन्नाटा ज्यादा महसूस होता है। उसी जगह पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अब मामला सिर्फ धरना या प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। उनकी लगातार बिगड़ती तबीयत ने दिल्ली हाईकोर्ट का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले पर तत्काल सुनवाई हुई। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों से जवाब तलब कर दिया। कोर्ट ने पूछा कि जब एक व्यक्ति इतने दिनों से भूख हड़ताल पर बैठा है और उसकी सेहत लगातार गिर रही है, तब प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं।

उधर जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों की चिंता भी अब पहले से ज्यादा बढ़ गई है। समर्थकों का कहना है कि वांगचुक अब काफी कमजोर दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों की टीम समय-समय पर उनका स्वास्थ्य देख रही है, लेकिन लगातार उपवास की वजह से शरीर पर असर साफ दिखाई देने लगा है।

जंतर-मंतर आने-जाने वाले लोग भी कुछ देर रुककर यही पूछते नजर आते हैं कि आखिर उनकी मांगों पर बातचीत कब होगी। कई लोग चुपचाप दूर से उन्हें देखते हैं और बिना कुछ बोले आगे बढ़ जाते हैं। माहौल में न नारेबाजी का शोर है और न किसी तरह का हंगामा। लेकिन खामोशी अपने आप में बहुत कुछ कहती है।

सोनम वांगचुक ने 28 जून से अपना अनशन शुरू किया था। उनका कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर वह बैठे हैं, उन पर सरकार को गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए। समर्थकों का भी यही कहना है कि अगर समय रहते बातचीत शुरू हो जाती तो शायद मामला अदालत तक नहीं पहुंचता।

हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद अब सबकी नजर गुरुवार पर टिकी है। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। अब देखना होगा कि सरकार कोर्ट के सामने क्या पक्ष रखती है और आगे क्या रास्ता निकलता है।

फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर बनी हुई है। लगातार 18 दिन से अन्न का एक दाना भी नहीं खाने की वजह से उनका शरीर काफी कमजोर पड़ चुका है। डॉक्टर लगातार निगरानी में हैं, लेकिन अगर अनशन लंबा खिंचता है तो परेशानी और बढ़ सकती है।

जंतर-मंतर पर मौजूद उनके समर्थकों का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी निजी मुद्दे की नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकाले। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

अब पूरा मामला अदालत की निगरानी में है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन काफी अहम माने जा रहे हैं। अगर कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत शुरू होती है तो इस गतिरोध का हल निकल सकता है। लेकिन अगर स्थिति जस की तस रही तो अनशन और लंबा चल सकता है, जिसका सीधा असर वांगचुक की सेहत पर पड़ने की आशंका है।

फिलहाल दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक तरफ अदालत की नजर है, दूसरी तरफ सरकार की जिम्मेदारी और तीसरी तरफ एक ऐसे व्यक्ति की सेहत, जिसने अपनी मांगों के लिए पिछले 18 दिनों से अन्न का त्याग कर रखा है। अब सबकी निगाह अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिकी हुई है।

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