पहले का जमाना याद है? गांव में अगर किसी को अपनी जमीन का कागज निकलवाना होता था, तो सुबह-सुबह गमछा कंधे पर डालकर अंचल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता था। वहां पहुँचो तो पहले लाइन, फिर बाबू का इंतजार, उसके बाद पता चलता था कि आज फाइल नहीं मिलेगी, कल आइए। कई लोगों का तो एक छोटे-से काम में दो-तीन दिन निकल जाते थे।
अब वैसा झंझट काफी हद तक खत्म हो गया है। बिहार सरकार ने जमीन से जुड़े कई रिकॉर्ड इंटरनेट पर उपलब्ध करा दिए हैं। मतलब अगर आपके हाथ में मोबाइल है और थोड़ा-बहुत इंटरनेट चलाना आता है, तो घर की चौखट पर बैठे-बैठे अपनी जमीन का खतियान देख सकते हैं। न किसी दलाल की जरूरत, न बेवजह ऑफिस के चक्कर।
सबसे पहले ये समझ लीजिए कि खतियान आखिर होता क्या है?
गांव में बहुत लोग कहते हैं, "हमरे पास जमीन का कागज है।" लेकिन जब पूछा जाए कि खतियान है या रसीद, तो कई लोग खुद उलझ जाते हैं।
दरअसल, खतियान जमीन का सरकारी ब्योरा होता है। इसमें लिखा रहता है कि जमीन किसके नाम दर्ज है, कितनी है, किस मौजा में है, उसका खाता नंबर क्या है और खेसरा नंबर कौन-सा है। आसान भाषा में कहें तो यही वह रिकॉर्ड है, जिससे पता चलता है कि सरकारी कागजात में जमीन की पहचान क्या है।
अगर कभी जमीन बेचनी हो, खरीदनी हो, बंटवारा कराना हो या बैंक से लोन लेना हो, तो यही रिकॉर्ड सबसे पहले देखा जाता है।
खाता नंबर और खेसरा नंबर में मत उलझिए
बहुत लोग दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग चीजें हैं।
खाता नंबर को ऐसे समझिए जैसे किसी परिवार का रजिस्टर। उसमें एक से ज्यादा जमीनें दर्ज हो सकती हैं।
वहीं खेसरा नंबर किसी एक खास प्लॉट की पहचान होता है। यानी अगर एक आदमी के नाम पाँच टुकड़े जमीन हैं, तो खाता एक हो सकता है, लेकिन खेसरा पाँच अलग-अलग होंगे।
इसलिए अगर आपके पास सिर्फ खेसरा नंबर है, तब भी काम चल जाएगा।
मोबाइल से खतियान निकालना है? तरीका सुन लीजिए
अब सबसे जरूरी बात।
मोबाइल का इंटरनेट चालू कीजिए और बिहार सरकार के भूमि रिकॉर्ड वाले पोर्टल पर जाइए।
सबसे पहले अपना जिला चुनिए।
फिर अंचल चुनिए।
उसके बाद मौजा का नाम चुनना होगा।
अब आपके सामने रिकॉर्ड खोजने के कई तरीके दिखाई देंगे। अगर खाता नंबर मालूम है तो उसी से खोज लीजिए। अगर खेसरा नंबर पता है तो उससे भी रिकॉर्ड मिल जाएगा। कई जगह नाम के आधार पर भी खोजने की सुविधा रहती है।
जानकारी भरने के बाद खोज वाले बटन पर दबाइए।
अगर रिकॉर्ड ऑनलाइन मौजूद होगा, तो कुछ ही पल में पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।
रिकॉर्ड खुल जाए तो सिर्फ नाम देखकर मत उठ जाइए
यही गलती सबसे ज्यादा होती है।
लोग अपना नाम देखकर खुश हो जाते हैं और बाकी चीजें देखते ही नहीं।
जब रिकॉर्ड खुले, तो आराम से पढ़िए। देखिए कि जमीन का रकबा सही लिखा है या नहीं। खेसरा नंबर वही है या नहीं? मौजा सही है या नहीं? अगर कहीं कोई गड़बड़ी दिखे, तो उसे हल्के में मत लीजिए।
आज छोटी गलती छोड़ देंगे, तो कल वही बड़ा झगड़ा बन सकती है।
अगर खाता नंबर नहीं पता तो?
कोई दिक्कत नहीं।
हर आदमी के पास पुराने कागज संभालकर नहीं रहते। कई बार बाढ़, आग या घर बदलने में कागज गायब हो जाते हैं।
ऐसे में अगर नाम से खोजने का विकल्प मिल रहा है, तो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं। कई मामलों में सिर्फ खेसरा नंबर से भी रिकॉर्ड निकल जाता है।
यानी खाता नंबर नहीं है, इसका मतलब यह नहीं कि रिकॉर्ड नहीं मिलेगा।
जमीन खरीदने जा रहे हैं तो एक काम जरूर कीजिए
मान लीजिए कोई आदमी कहता है कि "भाई, जमीन बिल्कुल साफ है, बिना झंझट की है।"
उसकी बात पर भरोसा करने से पहले एक बार ऑनलाइन रिकॉर्ड जरूर देख लीजिए।
कई बार कागज कुछ और कहते हैं और रिकॉर्ड कुछ और।
कहीं ऐसा न हो कि बाद में पता चले कि जमीन किसी दूसरे के नाम है या उस पर पहले से विवाद चल रहा है।
पांच मिनट की जांच लाखों रुपये बचा सकती है।
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ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर क्या-क्या फायदा होगा?
सबसे बड़ा फायदा तो यही कि सरकारी दफ्तर के बेकार चक्कर कम लगेंगे।
दूसरी बात, किसी दलाल को पैसे नहीं देने पड़ेंगे।
तीसरी बात, अपने गांव से बाहर रह रहे लोग भी मोबाइल से रिकॉर्ड देख सकते हैं। चाहे दिल्ली में मजदूरी कर रहे हों, पंजाब में खेती कर रहे हों या कतर-दुबई में नौकरी कर रहे हों, अपने गांव की जमीन का रिकॉर्ड वहीं से देख सकते हैं।
यही वजह है कि अब पहले के मुकाबले लोगों को काफी राहत मिली है।
रिकॉर्ड नहीं खुल रहा तो घबराइए मत
कभी-कभी वेबसाइट धीमी चलती है।
कभी सर्वर पर ज्यादा लोग आ जाते हैं।
कई बार खाता या खेसरा नंबर गलत भर देने से भी रिकॉर्ड नहीं मिलता।
ऐसे में पहले जानकारी दोबारा जांच लीजिए। फिर भी बात नहीं बने, तो अंचल कार्यालय जाकर जानकारी की पुष्टि कर लें। हो सकता है रिकॉर्ड अभी ऑनलाइन अपडेट नहीं हुआ हो।
एक जरूरी बात और
ऑनलाइन दिख रहा रिकॉर्ड जानकारी देखने के लिए बहुत काम का है। लेकिन अगर अदालत, बैंक या किसी सरकारी दफ्तर में आधिकारिक कागज जमा करना है, तो कई मामलों में प्रमाणित प्रति मांगी जाती है। इसलिए जरूरत पड़ने पर संबंधित कार्यालय से प्रमाणित कॉपी भी जरूर निकलवा लें।
आखिर में बस इतनी-सी बात...
आज जब मोबाइल से पैसे भेजे जा रहे हैं, गैस बुक हो रही है, ट्रेन का टिकट कट रहा है, तो जमीन का रिकॉर्ड देखने के लिए भी बेवजह धक्के खाने की जरूरत नहीं है। अगर आपके पास खाता नंबर, खेसरा नंबर या जरूरी जानकारी है, तो कुछ मिनट निकालिए और एक बार अपनी जमीन का रिकॉर्ड जरूर देख लीजिए।
क्योंकि जमीन का मामला ऐसा होता है जिसमें लापरवाही बाद में बहुत महंगी पड़ती है। थोड़ा समय देकर पहले ही सब कुछ जांच लेना हमेशा समझदारी का सौदा होता है।


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